अपने परिवार को छोड़, सीमा पर वो खड़ा,
हर सैनिक का दिल. देशभक्ति से भरा ।
सरहद पर एक फौजी अपना वादा निभा रहा हैं,
वो धरती माँ की मोहब्बत का कर्ज चुका रहा हैं।
सीमा नहीं बना करतीं हैं
काग़ज़ खींची लकीरों से,
ये घटती-बढ़ती रहती हैं
वीरों की शमशीरों से।
वतन की मोहब्बत में, खुद को तपाये बैठे हैं,
मरेंगे वतन के लिए, शर्त मौत से लगाये बैठे हैं।
फौजी भी कमाल के होते हैं,
जेब के छोटे बटुए में परिवार
और दिल मे सारा हिंदुस्तान रखते हैं।
हम चैन से सो पाए इसलिए ही वो सो गया,
वो फौजी ही था जो आज शहीद हो गया।
शेर सा जिगर और गजब
के शौक रखता हूँ,
अपने देश के खातिर
हथेली पर जान रखता हूँ।
सरहद पर एक फौजी
अपना वादा निभा रहा हैं,
वो धरती माँ की मोहब्बत
का कर्ज चुका रहा हैं।